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मंगलवार, मार्च 26

बोल चिड़िया के

                                                     
न रूठूँगी  तुम  से  ऐ-ज़िंदगी, 
बन मधुमास  मिलेंगे   दोबारा, 
लौटेंगे   हसीं  ख़्वाब, नक्षत्र बन, 
चमकेगा सौभाग्य का सितारा |

आँखों   में  उमड़े  स्वप्न  गूँथूँ,  
दमकना ज़िंदगी  तुम दुल्हन बनके, 
अस्तित्त्व अपना जताने उठना, 
 झलकना  आँखों  से  अश्रु-तारे  बनके | 

हो न अनहोनी का अंदेशा, 
तुम निर्भीक तेज़ हृदय को  पिला  देना,  
अटल पाषाण-सा वक़्त का साथ, 
 ज़िंदगी  के  हाथों   में  थमा  देना |

न  गुज़रेगें    फिर इस राह से, 
एक  घूँट  मोहब्बत  का ज़िंदगी  को पिला देना, 
पथ  नहीं यह  जीवन का, 
  प्रीतदीप  राह में  जला  देना |

दर्द का जीवन में बहे  दरिया, 
 ऐसा संचार  साँसों  में  बहा  देना,  
छूट रही  ज़िंदगी , बन सैकत, 
कुछ पल का ठहराव दिला देना |

तड़प रही  मानवता   एक  घूँट   अमृत   पिला  देना,  
थामे वक़्त  की  अँगुली  चलना   सिखा  देना |

काँच के टुकड़ों-सा बिखर रहा मानव, 
साँसों  की अहमियत ज़िंदगी  तुम  बता देना, 
तिमिर में छुपाया  मुँह, 
रो  रहा  तेज़  तुम अश्रु  पोंछ  देना |

    -अनीता सैनी