बन मधुमास मिलेंगे दोबारा,
लौटेंगे हसीं ख़्वाब, नक्षत्र बन,
चमकेगा सौभाग्य का सितारा |
आँखों में उमड़े स्वप्न गूँथूँ,
दमकना ज़िंदगी तुम दुल्हन बनके,
अस्तित्त्व अपना जताने उठना,
झलकना आँखों से अश्रु-तारे बनके |
हो न अनहोनी का अंदेशा,
तुम निर्भीक तेज़ हृदय को पिला देना,
अटल पाषाण-सा वक़्त का साथ,
ज़िंदगी के हाथों में थमा देना |
न गुज़रेगें फिर इस राह से,
एक घूँट मोहब्बत का ज़िंदगी को पिला देना,
पथ नहीं यह जीवन का,
प्रीतदीप राह में जला देना |
दर्द का जीवन में बहे दरिया,
ऐसा संचार साँसों में बहा देना,
छूट रही ज़िंदगी , बन सैकत,
कुछ पल का ठहराव दिला देना |
तड़प रही मानवता एक घूँट अमृत पिला देना,
थामे वक़्त की अँगुली चलना सिखा देना |
काँच के टुकड़ों-सा बिखर रहा मानव,
साँसों की अहमियत ज़िंदगी तुम बता देना,
तिमिर में छुपाया मुँह,
रो रहा तेज़ तुम अश्रु पोंछ देना |
-अनीता सैनी
