चाक की स्मृति
✍️ अनीता सैनी
…....
नदी के किनारे
सुराख़ लिए एक घड़ा
वर्षों तक
चुप पड़ा रहता है।
पर पानी की आहट
वह अब भी
सबसे पहले
पहचान लेता है।
उसकी देह की दरारों में
चाक की स्मृति
अब भी बची है।
लोग कहते हैं-
"वह टूट गया।"
पर वे यह नहीं कहते-
कि हर संध्या
एक नदी
अपना थोड़ा-सा जल
उसकी ओर
सरका जाती है।
उसकी चुप्पी
एक छोटी-सी चिड़िया के लिए
डाल बन जाती है।
वह
क्षण-भर ठहरती है,
फिर उड़ जाती है।
और अँधेरा...
वह उसके भीतर
उतरता नहीं।
रात भर
उसके पास बैठा रहता है।
सुबह होने पर
सबसे पहले
वहीं से
एक किरण उठती है।
वह
किसी छाँव की तलाश में नहीं है।
बहुत पहले
उसके भीतर
एक वृक्ष
उग आया था।

बेहतरीन रचना
जवाब देंहटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंआशा संचार करती रचना
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