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शनिवार, जनवरी 1

२०२२ कहता है



२०२२ कहता है

तुम भावों में शब्दों को 

होंठो पर मुस्कुराहट जड़ो

मैं उल्लास लाया हूँ।


यों मायूसी में न सिमटो

खो जाओ स्वप्न में  

दौड़ गंतव्य की ओर 

मैं पता साहस का लाया हूँ।


चाँद की शीतलता

चाँदनी का लेप बनकर 

दंभ को धोने धरा से

मैं कटोरा उजास का लाया हूँ।


अंतस की परतों में ढूँढ

सब्र के बाँध में तलाशो 

प्रभात की किरणों में ढला 

प्रीत के लिबास में आया हूँ।


@अनीता सैनी 'दीप्ति'