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शुक्रवार, अप्रैल 12

स्नेह की लालिमा


स्नेह की लालिमा, 
फैली यूँ धरा पर दूर तलक,   
मख़मली कोमल एहसासों में,  
लिपटा  ज़मीं  से नील-फ़लक |

तरु की साख झुकी भूतल पर,  
पाने धरा का निर्मल  स्पर्श, 
हर्ष में डूबा खिलखिला रहा मन,  
 उठी लहर सागर में,प्रीत की रही वो  झलक|



आशा-अभिलाषा संग कमनीय, 
मृदुल प्रमोद में चमक रही  हृदय की लालसा, 
पिया संग गाये  मधुर रागिनी, बैठ साँझ सिरहाने, 
 मादकता में डूबा क्षितिज निहारे धरा को अपलक |



- अनीता सैनी