नयनों से लख-लख प्रश्न प्रिये,
जीवन तुझपर वार दिया है,
साँसें पूछ रहीं हाल प्रिये।
समय निगोड़ा हार न माने,
पुरवाई उड़ती उलझन में,
पल-पल पूछूँ हाल उसे मैं,
नटखट उलझाता रुनझुन में
कुशल संदेश पात पर लिख दो,
चंचल चित्त अति व्याकुल प्रिये।।
भाव रिक्त कहता मन जोगी,
नितांत शून्य आंसू शृंगार,
भाव की माला गूँथे स्वप्न,
चेतन में बिखरे बारबार,
अवचेतन सँग गूँथ रहीं हूँ,
कैसा जीवन जंजाल प्रिये।।
सीमाहीन क्षितिज-सी साँसें,
तिनका-तिनका सौंप रही हूँ,
आकुल उड़ान चाह मिलन की,
भाव-शृंखला भूल रही हूँ,
सुध बुद्ध भूली प्रिय राधिका,
कैसी समय की ये चाल प्रिये।।
© अनीता सैनी

