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सोमवार, मार्च 4

सत्य का डोलता अस्तित्त्व


                                      
     वक़्त के थपेड़ों से, 
    मन कुछ  डोल-सा गया, 
    बुनियाद पर किया विचार, 
    फिर आज को तौल-सा गया |

    ख़तरे  में  अस्तित्त्व,  
   छूट   रही   पहचान,  
    गर्दिश  चेहरे  पर, 
    खोखला हुआ इनाम |

    झूठ, हिंसा,  भारी  तन पर, 
    रहा,  सत्ता-शक्ति   का  हाथ, 
  राह    चुनी     प्रीत  की, 
   हुई    द्वेष    के   साथ |


    समय   के  सागर  में, 
  निष्ठा  और  आत्मविश्वास, 
   क़दमों  को  गढ़ाये   रखा, 
   साथ   अटूट   विश्वास |

        - अनीता सैनी