मन कुछ डोल-सा गया,
बुनियाद पर किया विचार,
फिर आज को तौल-सा गया |
ख़तरे में अस्तित्त्व,
छूट रही पहचान,
गर्दिश चेहरे पर,
खोखला हुआ इनाम |
झूठ, हिंसा, भारी तन पर,
रहा, सत्ता-शक्ति का हाथ,
राह चुनी प्रीत की,
हुई द्वेष के साथ |
समय के सागर में,
निष्ठा और आत्मविश्वास,
क़दमों को गढ़ाये रखा,
साथ अटूट विश्वास |
- अनीता सैनी
