गूँगी गुड़िया

अनीता सैनी

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शनिवार, सितंबर 26

वर्तमान की पीर

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  कुछ दौड़  कुछ होड़ हारने की   पेपर पर स्याही उड़ेल गलाने की    किसानों का निवाला छीनने की थी  देह दर्द से टूटी थी आसमान की   शब्दों में पीड़ा ...
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अनीता सैनी
मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
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