गूँगी गुड़िया
अनीता सैनी
बुधवार, जुलाई 15
चाक की स्मृति
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चाक की स्मृति ✍️ अनीता सैनी ….... नदी के किनारे सुराख़ लिए एक घड़ा वर्षों तक चुप पड़ा रहता है। पर पानी की आहट वह अब भी सबसे पहले...
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मंगलवार, जून 23
प्रतीक्षाएँ जब उम्र खाने लगती हैं
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प्रतीक्षाएँ जब उम्र खाने लगती हैं, ✍️अनीता सैनी …… प्रतीक्षाएँ जब उम्र खाने लगती हैं, तब संसार वैसा नहीं रहता जैसा पहले था। सुब...
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बुधवार, जून 17
रेत के पार…
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रेत के पार… ✍️अनीता सैनी ….. वह मरुस्थल में उगा एक वृक्ष था, जहाँ पानी सिर्फ स्मृति में बचा था, और छाँव कभी-कभी किसी थकी हुई व्...
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बुधवार, जून 3
अनकहा जल
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अनकहा जल ✍️ अनीता सैनी …. एक समय के बाद देखने के लिए अंधा हो जाना पड़ता है। जल अपनी पारदर्शिता में तल नहीं देख पाता, वैसे ही आँ...
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मंगलवार, मई 19
अधखुला किवाड़
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अधखुला किवाड़ ✍️ अनीता सैनी …… किसी वृक्ष का नाम नहीं लिखना, न किसी ऋतु का। इतना भर रहने देना हर मुस्कान आश्रय नहीं होती, और हर ...
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शनिवार, मई 9
धूप और छाँव के बीच
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धूप और छाँव के बीच ✍️ अनीता सैनी वृक्ष देखता है- धूप, छाँव के खेल में कौन कितना झरा, और अंत में किसके हिस्से बची धूप वे आते-जाते...
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गुरुवार, मई 7
भात की गंध
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भात की गंध ✍️ अनीता सैनी ‘था’ अक्सर दीवारों पर चिपका रह जाता है धुएँ की पतली परत बनकर, जिसे बरसों बाद भी उँगलियाँ छू लें तो गंध ...
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रविवार, अप्रैल 26
प्रतीक्षा से परे
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प्रतीक्षा से परे ✍️ अनीता सैनी नदी के किनारे बैठे रहना वर्षों तक प्रतीक्षा को साधना समझकर। फिर एक दिन जाना प्रतीक्षा धीरे-धीरे ...
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शनिवार, अप्रैल 18
धूप के माथे पर खिला एक फूल
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धूप के माथे पर खिला एक फूल ✍️ अनीता सैनी ……. मरुस्थल में जो प्यास लिए दौड़ती है, वह मृगमरीचिका नहीं धूप के माथे पर खिला एक फूल ...
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