गूँगी गुड़िया
अनीता सैनी
मंगलवार, मार्च 31
बाबा, अब तुम सो जाया करो
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बाबा, अब तुम सो जाया करो ✍️ अनीता सैनी ….. बाबा, अब तुम सुकून से सो जाया करो। रात को आँगन में चाँद जब उतर आए, तो उसकी चुप्पी ओढ़...
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गुरुवार, मार्च 26
ठीक पहले
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ठीक पहले ✍️ अनीता सैनी …… ऐसा नहीं है कि उसे लिखना नहीं आया स्त्रियाँ बहुत कम लिखती हैं वे बस जीती हैं। मोक्ष के द्वार पर सबसे ...
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मंगलवार, मार्च 24
मौन की तलछट
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मौन की तलछट ✍️ अनीता सैनी … नेपथ्य की धूल कविता की जड़ों में उतरती वह नमी है, जो मिट्टी की नसों में बहती है और पत्तों की हरियाली...
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शुक्रवार, मार्च 6
खार
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कविता- खार ✍️ अनीता सैनी ….. मरुस्थल ने एक ही बात दोहराई कि सूरज ने नहीं, एक महीन सुराख़ ने समंदर को सोख लिया। वह सुराख़ पुरान...
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शुक्रवार, फ़रवरी 20
कालिख का वृत्त
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कालिख का वृत्त ✍️ अनीता सैनी ….. उन दिनों दसों दिशाओं में सूखा ही सूखा पसरा पड़ा था जैसे समय ने अपनी नमी सोख ली हो। ...
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मंगलवार, फ़रवरी 10
जीवन का हस्ताक्षर
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जीवन का हस्ताक्षर ✍️ अनीता सैनी …. बहुत सुंदर संयोग है, या कहूँ अर्थ से भरी हुई नियति। पीछे पलट कर न देखने की चाह के बावजूद समय ...
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मंगलवार, जनवरी 27
ख़ाली किनारे
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ख़ाली किनारे ✍️ अनीता सैनी …….. यहाँ इस समाज नाम की चारदीवारी में किसी न किसी को कुछ न कुछ बचाने का ज़िम्मा चुपचाप सौंप दिया जात...
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बुधवार, जनवरी 21
मौन का पड़ाव
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मौन का पड़ाव / अनीता सैनी ……. उसकी शिथिल पड़ती जुबान… पर तुम उस एकांत को छू नहीं सकते जहाँ देह नहीं, भाव आख़िरी साँस भरते हैं।...
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रविवार, जनवरी 4
उस ओर
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उस ओर ✍️ अनीता सैनी …… अगर तुम ले जा सकते हो, तो ले चलो उस शोर के पार जहाँ दुनिया अपने जूतों की आवाज़ दरवाज़े पर उतार देती है...
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