गूँगी गुड़िया
अनीता सैनी
मंगलवार, अगस्त 18
आठवाँ पहर
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आठवाँ पहर ✍️अनीता सैनी ...... कई सौ साल पहले सदी का आख़िरी ग्रहण उतरा सूरज के पाँव में कालिख उतर आई और एक पहर समय से बाह...
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सोमवार, अगस्त 10
पीठ पर परछाई
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पीठ पर परछाई ✍️ अनीता सैनी ……. मैंने सपने नहीं देखे। मेरे पास कल्पना की तितली नहीं थी, सच का डोलता बड़ा-सा बादल था। मेरे भार से ...
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शुक्रवार, जुलाई 31
अनलिखी स्त्रियाँ
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अनलिखी स्त्रियाँ ✍️ अनीता सैनी सबसे कठिन है उन स्त्रियों को पढ़ पाना जिन्हें लिखना नहीं आता। दुःख का दाग उनकी ओढ़नी पर नहीं, आँख...
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शुक्रवार, जुलाई 24
काई की पहली हरियाली
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काई की पहली हरियाली ✍️ अनीता सैनी …… मुझे किसी ने कोई नक्शा नहीं दिया। फिर भी हर मोड़ पर मेरे हाथ में दिशा पूछ ली गई। धीरे-धीरे ...
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बुधवार, जुलाई 15
चाक की स्मृति
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चाक की स्मृति ✍️ अनीता सैनी ….... नदी के किनारे सुराख़ लिए एक घड़ा वर्षों तक चुप पड़ा रहता है। पर पानी की आहट वह अब भी सबसे पहले...
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मंगलवार, जून 23
प्रतीक्षाएँ जब उम्र खाने लगती हैं
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प्रतीक्षाएँ जब उम्र खाने लगती हैं, ✍️अनीता सैनी …… प्रतीक्षाएँ जब उम्र खाने लगती हैं, तब संसार वैसा नहीं रहता जैसा पहले था। सुब...
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बुधवार, जून 17
रेत के पार…
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रेत के पार… ✍️अनीता सैनी ….. वह मरुस्थल में उगा एक वृक्ष था, जहाँ पानी सिर्फ स्मृति में बचा था, और छाँव कभी-कभी किसी थकी हुई व्...
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बुधवार, जून 3
अनकहा जल
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अनकहा जल ✍️ अनीता सैनी …. एक समय के बाद देखने के लिए अंधा हो जाना पड़ता है। जल अपनी पारदर्शिता में तल नहीं देख पाता, वैसे ही आँ...
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मंगलवार, मई 19
अधखुला किवाड़
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अधखुला किवाड़ ✍️ अनीता सैनी …… किसी वृक्ष का नाम नहीं लिखना, न किसी ऋतु का। इतना भर रहने देना हर मुस्कान आश्रय नहीं होती, और हर ...
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