गूँगी गुड़िया
अनीता सैनी
मंगलवार, अक्टूबर 27
पीठ पर दरवाज़ा
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पीठ पर दरवाज़ा ✍️ अनीता सैनी …. मैंने स्मृति की तह में हाथ डाला, उँगलियों पर एक पुराना स्पर्श लगा रह गया। उसे धोने के लिए मैं कु...
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बुधवार, अक्टूबर 14
जादुई झोला
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जादुई झोला ✍️ अनीता सैनी ....... कवि के पास एक झोला होता है- जादुई झोला। नियति उसे भेंट देती है। उसमें रंग-बिरंगी कविताएँ होती ह...
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बुधवार, अक्टूबर 7
आवाज़
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आवाज़ ✍️ अनीता सैनी ……. रेत के भीतर कितनी आवाज़ें थीं मैंने कभी उन्हें सुनना नहीं चाहा। वे साँस लेतीं, तो मेरे पास कुछ और अधूरा-...
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शनिवार, सितंबर 26
उस पार
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उस पार ✍️ अनीता सैनी … हे जीवन, इतना भी मत कस अपनी मुट्ठी की गिरह, कि भीतर बैठी चिड़िया आकाश का नाम भूल जाए। इतना भी मत खींच दिन...
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मंगलवार, सितंबर 15
अपनी ही मिट्टी में
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अपनी ही मिट्टी में ✍️ अनीता सैनी साँस लेने के लिए छूट जाते हैं कुछ पत्ते पेड़ों से, और कुछ पन्ने किताबों से। वे तारीख़ नहीं...
मंगलवार, अगस्त 18
आठवाँ पहर
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आठवाँ पहर ✍️अनीता सैनी ...... कई सौ साल पहले सदी का आख़िरी ग्रहण उतरा सूरज के पाँव में कालिख उतर आई और एक पहर समय से बाह...
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सोमवार, अगस्त 10
पीठ पर परछाई
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पीठ पर परछाई ✍️ अनीता सैनी ……. मैंने सपने नहीं देखे। मेरे पास कल्पना की तितली नहीं थी, सच का डोलता बड़ा-सा बादल था। मेरे भार से ...
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शुक्रवार, जुलाई 31
अनलिखी स्त्रियाँ
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अनलिखी स्त्रियाँ ✍️ अनीता सैनी सबसे कठिन है उन स्त्रियों को पढ़ पाना जिन्हें लिखना नहीं आता। दुःख का दाग उनकी ओढ़नी पर नहीं, आँख...
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शुक्रवार, जुलाई 24
काई की पहली हरियाली
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काई की पहली हरियाली ✍️ अनीता सैनी …… मुझे किसी ने कोई नक्शा नहीं दिया। फिर भी हर मोड़ पर मेरे हाथ में दिशा पूछ ली गई। धीरे-धीरे ...
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