गूँगी गुड़िया
अनीता सैनी
मंगलवार, मई 19
अधखुला किवाड़
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अधखुला किवाड़ ✍️ अनीता सैनी ... किसी वृक्ष का नाम नहीं लिखना, न किसी ऋतु का। कुछ टूटनें पहले से ही आकाश में लिखी होती हैं। इतना...
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शनिवार, मई 9
धूप और छाँव के बीच
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धूप और छाँव के बीच ✍️ अनीता सैनी वृक्ष देखता है- धूप, छाँव के खेल में कौन कितना झरा, और अंत में किसके हिस्से बची धूप वे आते-जाते...
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गुरुवार, मई 7
भात की गंध
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भात की गंध ✍️ अनीता सैनी ‘था’ अक्सर दीवारों पर चिपका रह जाता है धुएँ की पतली परत बनकर, जिसे बरसों बाद भी उँगलियाँ छू लें तो गंध ...
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रविवार, अप्रैल 26
प्रतीक्षा से परे
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प्रतीक्षा से परे ✍️ अनीता सैनी नदी के किनारे बैठे रहना वर्षों तक प्रतीक्षा को साधना समझकर। फिर एक दिन जाना प्रतीक्षा धीरे-धीरे ...
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शनिवार, अप्रैल 18
धूप के माथे पर खिला एक फूल
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धूप के माथे पर खिला एक फूल ✍️ अनीता सैनी ……. मरुस्थल में जो प्यास लिए दौड़ती है, वह मृगमरीचिका नहीं धूप के माथे पर खिला एक फूल ...
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बुधवार, अप्रैल 8
मैंने ही सींचा था, यह अँधेरा
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मैंने ही सींचा था, यह अँधेरा ✍️ अनीता सैनी …… कविता के भीतर एक सूखी नदी में रात का बासी पानी उँडेला गया था। दलदल बारिश का नहीं, ...
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मंगलवार, मार्च 31
बाबा, अब तुम सो जाया करो
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बाबा, अब तुम सो जाया करो ✍️ अनीता सैनी ….. बाबा, अब तुम सुकून से सो जाया करो। रात को आँगन में जब चाँद उतर आए, तो उसकी चुप्पी ओढ़...
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गुरुवार, मार्च 26
ठीक पहले
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ठीक पहले ✍️ अनीता सैनी …… ऐसा नहीं है कि उसे लिखना नहीं आया स्त्रियाँ बहुत कम लिखती हैं वे बस जीती हैं। मोक्ष के द्वार पर सबसे ...
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मंगलवार, मार्च 24
मौन की तलछट
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मौन की तलछट ✍️ अनीता सैनी … नेपथ्य की धूल कविता की जड़ों में उतरती वह नमी है, जो मिट्टी की नसों में बहती है और पत्तों की हरियाली...
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