'इसलिए' 'किसलिए' मिलकर
रिश्तों को दफ़नाने के लिए
जब गहरी खाई खोदने लगे
'आप' से 'तुम' और 'तू' पर
ज़बान का लहजा अटक जाए
'तू'-'तू' के इस खेल में
'मैं' के बीज का अंकुर फूटने लगे
भावों की नदी अविरल
दिन-रात उसे सींचने लगे
तब तुम थोड़ा-सा
लाओत्से को पढ़ लेना।
@अनीता सैनी 'दीप्ति'
