गूँगी गुड़िया

अनीता सैनी

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शनिवार, मई 16

नवीन किसलय मुरझाए बंधु

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कंधों पर सुकून का अँगोछा  मग्न आज किस लय में बंधु।   तरुवर पथ की  सूखी शाख़  नवीन किसलय मुरझाए बंधु।  असहाय की छलकती पीड़ा  ...
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अनीता सैनी
मैं एक ब्लॉगर हूँ, स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हूँ, प्रकृति के निकट स्वयं को पाकर रचनाएँ लिखती हूँ, कविता भाव जगाएँ तो सार्थक है, अन्यथा कविता अपना मर्म तलाशती है |
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