उनके लिए घर नहीं बना?
वह घर पर नहीं रह सकता ?
मैंने कुएँ से पूछा, उसने भी यही कहा!
उनके लिए घर नहीं बना
वह घर पर नहीं रह सकता
सदियों से कुआँ ऐसा ही बोलता आया है
माँ ने कहा -
घर पर रहने से नाकारा, निकम्मा
होने की मुहर लगा दी जाती है
वह ठप्पा उसे बहुत चुभता है
चुभन से काया पर फफोले पड़ जाते हैं
जिससे उसे कोढ़ का आभास होता है
तू जानती है न?
कोढ़ी मरीज़ से सब दूर भागते हैं!
समाज से कटकर
वह जीवित नहीं रह सकता
टूटने-रूठने, आँखों में पानी भरने के
किस गुनाह पर पता नहीं
परंतु ऐसे अधिकतर अधिकार
उससे छीन लिए गए हैं।
माँ की हाँ में
गर्दन नहीं झुकाना चाहती थी
स्वतः झुक गई
एक स्मृति के साथ
एक बार उसने कहा था -
पंद्रह लोग गए थे हम
दस सफ़र में छूट गए
पाँचो के नाम दिल्ली में लिखें हैं
तब वह टूटना चाहता था, नहीं टूटा
घर पर रुकना चाहता था, नहीं रुका!
@अनीता सैनी 'दीप्ति'

