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मंगलवार, अक्टूबर 15

करवा-चौथ के चाँद को निहारती



पावन प्रीत के सुन्दर सुकोमल सुमन, 
सुशोभित स्नेह से करती हर साल, 
अलंकृत करती हृदय में प्रति पल ,  
यादों का कलित मंगलमय थाल | 

  अखंड ज्योति प्रिये-प्रीत में सुलगती साँसों की,  
जीवन के प्रति दिन,दिन के प्रति पहर, 
फ़ासले सहेजती सीने में ,   
करती प्रज्वलित दिलों के दरमियाँ, 
प्रीत की राह में प्रेम के उजले दीप |

 कोमल कामना चिरायु की सजाये सीने में शिद्द्त से, 
करवा-चौथ के चाँद को निहारती,  
चाँद-चाँदनी बिछाये क़दम-क़दम पर राह में,  
 यही फ़रियाद करती सितारों से |

निर्जल देह से सिंचती प्रिये-पथ, 
 प्रति पहर करती पल्लवित,
आस्था के पनीले पत्तों की पावन बेल |

 टांगती पल-पल पात-पात पर, 
मधुर शब्दों में गूँथें विश्वास के मनमोहक गुँचे, 
 पावन प्रेमल प्रसून वह प्रार्थना में तुम्हारे |

© अनीता सैनी