पावन प्रीत के सुन्दर सुकोमल सुमन,
सुशोभित स्नेह से करती हर साल,
अलंकृत करती हृदय में प्रति पल ,
सुशोभित स्नेह से करती हर साल,
अलंकृत करती हृदय में प्रति पल ,
यादों का कलित मंगलमय थाल |
अखंड ज्योति प्रिये-प्रीत में सुलगती साँसों की,
जीवन के प्रति दिन,दिन के प्रति पहर,
जीवन के प्रति दिन,दिन के प्रति पहर,
फ़ासले सहेजती सीने में ,
करती प्रज्वलित दिलों के दरमियाँ,
प्रीत की राह में प्रेम के उजले दीप |
कोमल कामना चिरायु की सजाये सीने में शिद्द्त से,
करवा-चौथ के चाँद को निहारती,
चाँद-चाँदनी बिछाये क़दम-क़दम पर राह में,
यही फ़रियाद करती सितारों से |
यही फ़रियाद करती सितारों से |
निर्जल देह से सिंचती प्रिये-पथ,
प्रति पहर करती पल्लवित,
आस्था के पनीले पत्तों की पावन बेल |
प्रति पहर करती पल्लवित,
आस्था के पनीले पत्तों की पावन बेल |
टांगती पल-पल पात-पात पर,
मधुर शब्दों में गूँथें विश्वास के मनमोहक गुँचे,
पावन प्रेमल प्रसून वह प्रार्थना में तुम्हारे |
© अनीता सैनी
पावन प्रेमल प्रसून वह प्रार्थना में तुम्हारे |
© अनीता सैनी

