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गुरुवार, मई 28

इंसानीयत हूँ

अनुसरण से आचरण में ढली 

इंसान में एकनिष्ठ  सदभाव हूँ। 
दग्धचित्त पर शीतल बौछार  
सरिता-सा प्रवाह इंसानीयत हूँ। 

निराधार नहीं अस्तित्त्व में लीन 
पुण्यात्मा  से बँधी करुणा हूँ। 
मधुर शब्द नहीं कर्म में समाहित 
नैनों से झलकता स्नेह अपार हूँ। 

शून्य सहचर अमरता वरदान 
मूक-बधिर भाव में झँकृत हूँ। 
साध सुगंध  सुंदर जीवन मैं 
 चेतना मानव की लिप्त आश्रय हूँ। 

सृष्टि में विद्यमान समंजित मर्मज्ञ 
जन-जीव के हृदय में निराकार हूँ। 
अंतःस्थ में विराजित एकाकी मौन 
जीवन पल्लवित सुख का आधार हूँ।

© अनीता सैनी  'दीप्ति'