अनुसरण से आचरण में ढली
इंसान में एकनिष्ठ सदभाव हूँ।
दग्धचित्त पर शीतल बौछार
सरिता-सा प्रवाह इंसानीयत हूँ।
निराधार नहीं अस्तित्त्व में लीन
पुण्यात्मा से बँधी करुणा हूँ।
मधुर शब्द नहीं कर्म में समाहित
नैनों से झलकता स्नेह अपार हूँ।
शून्य सहचर अमरता वरदान
मूक-बधिर भाव में झँकृत हूँ।
साध सुगंध सुंदर जीवन मैं
चेतना मानव की लिप्त आश्रय हूँ।
सृष्टि में विद्यमान समंजित मर्मज्ञ
जन-जीव के हृदय में निराकार हूँ।
अंतःस्थ में विराजित एकाकी मौन
जीवन पल्लवित सुख का आधार हूँ।
© अनीता सैनी 'दीप्ति'
© अनीता सैनी 'दीप्ति'

