जादुई झोला
✍️ अनीता सैनी
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कवि के पास
एक झोला होता है-
जादुई झोला।
नियति
उसे भेंट देती है।
उसमें रंग-बिरंगी
कविताएँ होती हैं।
शुरू-शुरू में
कवि उसे
कंधे पर टाँगने से इनकार करता है।
नियति उसे
डाँटती-फटकारती है।
एक उम्र तक
दोनों खूब झगड़ते हैं।
फिर
एक दिन
कवि झोले में हाथ डालता है।
रंगों के बीच
नियति की उँगलियाँ
छू जाती हैं।
उस दिन
कवि
नियति के प्रेम में पड़ जाता है।
और वह
कवि से जादूगर हो जाता है।

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