अनलिखी स्त्रियाँ
✍️ अनीता सैनी
सबसे कठिन है
उन स्त्रियों को पढ़ पाना
जिन्हें
लिखना नहीं आता।
दुःख का दाग
उनकी ओढ़नी पर नहीं,
आँखों में
रेत की महीन किरच-सा
अटका रहता है।
वे रास्ते नहीं नापतीं,
अपने ही चारों ओर
एक वृत्त रचती हैं।
उसी वृत्त में
उम्र
अपनी एड़ियाँ
धीरे-धीरे घिसती रहती है।
हर सुबह
एक नया दिन जन्म लेता है,
और हर रात
वे किसी अधूरी कविता के भीतर
धीरे-धीरे उतर जाती हैं—
जहाँ
हर दिन वे
एक नए उपन्यास की
अनकही नायिकाएँ होती हैं।

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