जादुई झोला
✍️ अनीता सैनी
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कवि के पास
एक झोला होता है-
जादुई झोला।
नियति
उसे भेंट देती है।
उसमें रंग-बिरंगी
कविताएँ होती हैं।
शुरू-शुरू में
कवि उसे
कंधे पर टाँगने से इनकार करता है।
नियति उसे
डाँटती-फटकारती है।
एक उम्र तक
दोनों खूब झगड़ते हैं।
फिर
एक दिन
कवि झोले में हाथ डालता है।
रंगों के बीच
नियति की उँगलियाँ
छू जाती हैं।
उस दिन
कवि
नियति के प्रेम में पड़ जाता है।
और वह
कवि से जादूगर हो जाता है।

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 16 अक्टूबर 2026 को लिंक की गयी है....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
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सुंदर प्रस्तुति.
जवाब देंहटाएंशब्दों का जादूगर!! तब नियति ही उससे कहलवाती है, जो कहलवाना चाहती है
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