शुक्रवार, फ़रवरी 20

कालिख का वृत्त


कालिख का वृत्त
✍️ अनीता सैनी
…..
उन दिनों
दसों दिशाओं में
सूखा ही सूखा पसरा पड़ा था
जैसे समय ने अपनी नमी
सोख ली हो।

बादल भी न भीगे,
न धरती का कोई कोर
बस
बिजली की एक रेखा
आकाश से उतरी
और
हरेपन की देह
एक ही क्षण में कोयला हो गई।

चाँद-सूरज
और हवा भी साक्षी थे।
जली हुई टहनियों पर
कभी किसी पक्षी ने
अपना पाँव नहीं रखा।

काली पड़ती छाल की ओर
वसंत ने भी
आँख नहीं उठाई।

बरसों बाद
एक बढ़ई आया,
उसने कालिख में
वृत्त खोज लिया।

अब वह
रास्तों की धूल में नहीं,
धूल की स्मृति में है,
जहाँ
हर घुमाव
मिट्टी से मिलकर
अपना पहला हरापन
धीरे से दोहराता है।

मंगलवार, फ़रवरी 10

जीवन का हस्ताक्षर


जीवन का हस्ताक्षर
✍️ अनीता सैनी
….
बहुत सुंदर संयोग है,
या कहूँ
अर्थ से भरी हुई नियति।

पीछे पलट कर
न देखने की चाह के बावजूद
समय
ख़ुद पलट कर
सामने आ खड़ा होता है।

ठीक उसी तारीख़ के साथ।
7 फ़रवरी, शनिवार
वह दिन
जब किसी नन्ही उँगली ने
मेरी उँगली थामी थी।

और दो दशक बाद
ठीक उसी शनिवार
7 फ़रवरी को
‘खरोंच’
मेरे जीवन में
प्रवेश करती है।

होनी कहती है-

यह कोई
सुंदर संयोग नहीं
जीवन का
अपना हस्ताक्षर है।

पर आप मुझे शुभकामनाएँ कह सकते हैं।
 बच्चों को खूब आशीर्वाद 💐